
अबकी बार बिहार में तेजस्वी यादव की सरकार या फिर एनडीए के नीतीश कुमार के फिर से बाहर? अबकी बार बिहार में जो यह बढ़कर आया है वोट यह बदलाव के लिए है या फिर नीतीश बाबू के ठहराव के लिए? यह जो 70% से ऊपर वोट पड़ा है, क्या यह 74 साल के नीतीश कुमार के हक में पड़ा है? या तेजस्वी बाबू को सरकार में लाने के लिए दिया गया है। वो जो एग्जिट पोल में पोल के पापा नीतीश कुमार की सरकार बनाने का दावा कर रहे हैं वो इस बार सही होंगे या एग्जिट पोल जो चुल्लू भर पानी में बीते कई चुनावों में डूब मरे थे। खासतौर पर 2015 में 2020 में वो फिर से एक बार चुल्लू भर पानी में नाक रगड़ेंगे और समझेंगे कि बाबू बिहार आसान नहीं है वेलकम टू बिहार। यहां एग्जिट पोल गलत हो जाता है या फिर इस बार एग्जिट पोल क्लियर मेजॉरिटी दे रहे हैं। बिहार का इतिहास कहता है कि नीतीश कुमार जिधर रहते हैं उधर सरकार बन जाती है।

लेकिन सवाल यह है कि इस बार जब बंपर ऐतिहासिक वोटिंग पड़ी है वो जो बिहार की हिस्ट्री में कभी नहीं हुई है तो इससे तवा से रोटी पलटेगी या यह रोटी यूं ही गरमागरम नीतीश कुमार की थाली में परोसी जाएगी। सवाल यह है कि हर घर नौकरी देने का दावा करने वाले तेजस्वी बाबू पर क्या महिलाओं की नीतीश कुमार की तरफ मेहरबानी भारी पड़ जाएगी? क्या बिहार में बंपर 70% वोटिंग नीतीश कुमार की सरकार सुनिश्चित कर दी है जो एग्जिट पोल कह रहे हैं। ₹10,000 जो नीतीश बाबू ने महिलाओं को दिया था वो हर घर नौकरी पर भारी पड़ गया है। यह सारा सवाल इसलिए है क्योंकि बिहार में आज दिनभर लंबी-लंबी कतार रही। सुबह से शाम तक पोलिंग बूथ पर जो दिखाई पड़ा वो सिर्फ वोट नहीं था भाई। वो ऐतिहासिक लम्हा था। और ये सारी बातें आज इसलिए हो रही है क्योंकि बिहार में दोनों फेज की वोटिंग खत्म हो गई है। 6 नवंबर को 121 और दूसरे चरण में 11 नवंबर को 122 सीटों पर वोटिंग हुई। 70 से ज्यादा परसेंट वोट जो है वो सिर्फ आंकड़ा नहीं है। इशारा है यह। लेकिन इशारे को समझे कैसे? एग्जिट पोल के जरिए या कमेंट सेक्शन के जरिए कि जनता का दिल किधर है भाई? सत्ता की तरफ या विरोध की तरफ? क्योंकि बिहार में इतना वोट कभी पड़ब नहीं किया। 1952 में जब पहली बार बिहार में लोकतंत्र सांस लिया था तब 42% वोट था। 2000 में मैक्सिमम जब वोट गया था तो 62% था। लेकिन इस बार 70% पार इस सेकंड फेज में कर गया है। और इसीलिए हर आदमी कैलकुलेट कर रहा है कि जनता की चेतावनी है या सरकार के भरोसे की मोहर। जितना बिहार हम गए थे वहां मैक्सिमम आदमी कह रहे थे कि भैया नीतीश जी का सरकार बन जाएगा।

एनडीए जो है वो सरकार बना लेगा। लेकिन एनडीए वालों से पूछते तो कहते थे कि भैया डर तो हमको भी लग रहा है। ऐसा तो नहीं है कहीं हरियाणा हो जाएगा। ये एग्जिट पोल वाले चढ़ा के रखे हैं। सर्वे वाले चढ़ा के रखे हैं। हर आदमी कह रहा है कि हमरे सरकार है। कहीं ऐसा तो नहीं मामला पलटा जाएगा। और अब जब चुनाव खत्म हो गया है। 14 नवंबर का इंतजार है तो एजेंसियों ने पोल निकाला। अब देखिए हम पोल तो निकालते नहीं है। तो हमने क्या किया? हमने सारे पोल वालों को पकड़ा और पोल का पापा बना दिया। पोल के पापा कहते हैं कि बिहार में जिन 17 एजेंसियों ने पोल किया उसमें एनडीए को 130 से 209 सीटें मिलने तक का अनुमान है। महागठबंधन को 70 से लेकर 100 तक। हालांकि आप याद रखिए बिहार के एग्जिट पोल हमेशा शर्मिंदा होते हैं। जैसा हमने कहा भी 2015 में इन्हीं एग्जिट पोल ने एनडीए को आगे दिखाया था। लेकिन तब महागठबंधन 178 सीट लेकर आई थी। 2020 में महागठबंधन को इन्होंने जीत का ख्वाब दिखाया था। तब एनडीए 125 लाकर सरकार बनाई थी। अब सवाल यह है कि इस बार का एग्जिट पोल क्या होगा? नीतीश बाबू का सरकार बनवाएगा या तेजस्वी बाबू को पहली बार मुख्यमंत्री पद पर पहुंचाएगा? आज बिहार में एग्जिट पोल का हम विश्लेषण करने वाले हैं। इसमें बता दें आपको यह जितनी बातें हम रखने वाले हैं इस सारा एग्जिट पोल को मिलाकर पोल के पापा और इसीलिए आज हम सारे पोल के पापाओं को आपके सामने रख रहे हैं कि क्या-क्या कहानी जो है वो निकल कर सामने आई है। तो एग्जिट पोल यह कह रहा है कि बिहार में एनडीए की सरकार है। हालांकि एग्जिट पोल को लेकर हमारा अपना तजुर्बा ये हमेशा रहता है कि एग्जिट पोल में अगर दो-चार पोल भी इधर-उधर दिखा रहे हैं तो फिर मामला गड़बड़ है। लेकिन अगर सारा पोल एक तरफ जा रहा है तो अधिकतर मामला सही निकलता है। अधिकतर मामला राइट टाइम रहता है। 2015 और 2020 में जो हम कहते हैं कि बिहार में पोल खराब हुआ था उसमें सारे एग्जिट पोल एक साथ नहीं लेकिन इस बार जो 17 एजेंसियों ने एग्जिट पोल किया है वो सब के सब एक तरफ गए और हम आपको एग्जिट पोल नाम वाइज बता दे रहे हैं। तो दैनिक भास्कर बड़ा अखबार है। हमको पसंद भी है अच्छा जानकारी देता है। उसके एग्जिट पोल में एनडीए को 145 सीट मिला है। 145 से 160 महागठबंधन 73 से 91 अब जादुई आंकड़ा 125 है तो यानी वह सरकार से तो बहुत दूर है। उनका कोई लेना देना नहीं है। बाकी सबको 510 में समेट दिया। यानी प्रशांत किशोर का मैजिक खत्म है। फिर आईएएस जो है उसका सर्वे कहता है कि 147 से 167 एनडीए है। 70 से 90 महागठबंधन है। यानी यहां भी महागठबंधन का सरकार में पहुंचने का कहानी नहीं है। बाकी शून्य से सात है। यानी प्रशांत किशोर यहां भी जीरो नील बटे सन्नाटा।

ओवैसी नील बटे सन्नाटा। फिर पीपल्स पल्स उन्होंने भी सर्वे किया है। 133 से 159 उन्होंने दिया है एनडीए को। 75 से 101 दिया है महागठबंधन को दो से 13 बाकी सब मिलाकर बाकी सब में हम प्रशांत किशोर ओवैसी लेकर चल रहे हैं तो आगे बार-बार रिपीट नहीं करेंगे। फिर पीपल इनसाइट है उन्होंने भी 133 से 148 दिया है एनडीए को। महागठबंधन को 87 से बया 102 और बाकी सब तीन से आठ। चाणक्य का पोल जो है वो कई बार चर्चा में रहा। 130 से लेकर 138 उन्होंने दिया है। 100 से लेकर 108 महागठबंधन को दिया है। तो यहां भी क्लियर मेजॉरिटी जो है वो एनडीए को जा रही है। पोल स्टेट ने 133 से 148 दिया है एनडीए को। 97 से 102 दिया है महागठबंधन को। तो यहां मामला क्लियर है। बाकी सब जो है वो 10 के अंदर ही है। इसलिए हम गिनती भी नहीं करेंगे। जेबीसी पोल ने 135 से 15 दिया है एनडीए को। महागठबंधन 88 से 1030 पोल डायरी ने तो इंतहा पार कर दी है। पोल डायरी के हिसाब से 184 से 209 जो है वो सीट मिलेगा एनडीए को। 200 पार कर दिया है। बाप रे उनके हिसाब से खाली महागठबंधन 3249 पाएगा। अब यह भी अपने आप में है। इतना वोट डाल दो कि साला आदमी कंफ्यूज हो जाए कि भैया या तो आर या पार और ऐसे लोग भी कई बार हैरान कर जाते हैं। हो सकता है ये उल्टा भी पड़ जाए। हो सकता है यही सही निकल जाए। क्योंकि चाणक्य भी पहले इसे एक तरफफ़ा दे दिया करता था और मामला सही बैठा एक दो बार उनका 184 से 209 पोल डायरी के हिसाब से जा रहा है एनडीए का टाइम्स नाउ ने दिया है 143 और 95 दे रहे हैं वो तेजस्वी बाबू को प्रज्ञा पोल है वो 186 दे रही है एनडीए को वो भी महागठबंधन 50 पे दे रहे हैं और पी मार्क वाले 142 दे रहे हैं 80 से 98 महागठबंधन टीआईएफ वाले 145 से 163 दे रहे हैं 76 से 95 दे रहे हैं इनको को क्या नाम है? आपके महागठबंधन को N 24 ने 152 दिया है। कामाख्या वालों ने 167 से 187 दे दिया है। डीवी रिसर्च N 18 रुद्र रिसर्च इन सब ने भी एनडीए को स्पष्ट बहुमत दिया है। यानी अधिकतर में 130 के ऊपर और 200 के अंदर 200 के आसपास तक दिखा रहे हैं। इसके हिसाब से माने तो अभी से यह क्लियर है कि बिहार में एक बार फिर से नीतीश कुमार। नीतीश कुमार का बनेगा सरकार। हालांकि बिहार में जनता किसको चुनती है? हम अभी भी कहेंगे कि बहुत हड़बड़ाइएगा नहीं। 14 तारीख को नतीजा आएगा उस दिन देख लीजिएगा। लेकिन पोल के पापा कहते हैं कि महागठबंधन का मामला गड़बड़ा गया है। और इसके पीछे कई वजह है। वजह पर जाएं उससे पहले प्रशांत किशोर की बात कर लेते हैं। जिन्होंने हमसे कहा था या तो आर या पार या अर्श या फर्श। तो अर्श तो गए नहीं वो फर्श पर ही हैं। कहा जा रहा है दो-तीन सीट में वो कड़े मुकाबले में हैं। हो सकता है बोहनी हो जाए। लेकिन दहाई में नहीं जाएंगे। ओवैसी एक पर आएंगे। आरजेडी को नुकसान हो रहा है कांग्रेस की वजह से। मुकेश सहनी जो हैं उनको भी बहुत नुकसान हो रहा है। कई बड़ी सीटें हैं जहां पर उलटफेर की बात कही जा रही है। जैसे डिप्टी सीएम विजय सिन्हा की सीट वहां पर लड़ाई बहुत टफ है। मैथिली ठाकुर का मामला आसान नहीं है। तेज प्रताप यादव का मामला आसान नहीं है। राम कृपाल यादव की दानापुर आसान नहीं है। सम्राट चौधरी की सीट जो है वहां पर भी कड़ी टक्कर है। तो इनमें अगर उठापटक हुआ तो आप सोच लीजिएगा। लेकिन इस बार का चुनाव खास इसलिए है क्योंकि बिहार ने इतना वोट कभी दिया ही नहीं। लगभग 70% वोट गया और यहीं से यह मामला गड़बड़ाया था कि भाई साहब इतना वोट जो है यह क्या नीतीश जी को बाय-ब देने के लिए नीतीश जी को फेयरवेल देने के लिए। हालांकि नीतीश बाबू 20 साल सत्ता में रहे। लेकिन बहुत बड़ा विद्रोह नहीं रहा उनके खिलाफ। महिलाओं ने उनको हमेशा समर्थन दिया। कई बूथों पर इस बार महिलाएं पुरुषों से आगे थी और इसीलिए ज्यादातर लोग मान रहे हैं कि नीतीश को जो महिलाओं का समर्थन मिला है यह गड़बड़ा दिया तेजस्वी जी का मामला।

वो युवाओं का समर्थन की बात कर रहे थे लेकिन महिलाएं युवाओं पर भारी पड़ गई। नौकरी दो या कुर्सी छोड़ो पर ₹100 जो था वो भारी पड़ गया। और इसका लॉजिक भी लोग दे रहे हैं कि लगभग ₹1वा करोड़ महिलाओं को ₹1 ₹100 दिया गया। एक परिवार में अगर दो-तीन वोटर भी हैं तो फिर तीन चार करोड़ महिलाएं जो है परिवार को लेके चल रही हैं। तो यह मामला गड़बड़ा गया। यह कहा जा रहा है। एक तेजस्वी बाबू का जंगल राज वाला भी मामला कहा जा रहा है कि गड़बड़ाया है। लेकिन एनडीए इस बार मजे में है। एनडीए पिछली बार 125 सीट पाई थी। इस बार कहा जा रहा है 20 से 35 सीट का फायदा हो जाएगा। जेडीयू कहा जा रहा है पिछली बार 43 सीट जीती थी। इस बार 59 से 68 सीट हो सकती है। 16 से 25 सीटों का फायदा हो सकता है। बीजेपी पिछली बार 74 सीट जीती इस बार 82 तक जा सकती है। एलजेपी को कहा जा रहा है कि उनका मामला थोड़ा सा आगे पीछे हो सकता है। मतलब यह एक उनका गड़बड़ है। हम ठीक चल रहा है। उपेंद्र कुशवाहा का खाता मुश्किल कहा जा रहा है। पता नहीं कितना सच कितना फंसाना। उपेंद्र कुशवाहा क्या होगा। महागठबंधन में कहा जा रहा है कि तेजस्वी ठीक करेंगे। तेजस्वी का गड़बड़ नहीं होगा लेकिन बाकी गड़बड़ है। तेजस्वी को थोड़ा बहुत डेंट होगा लेकिन फिर भी वह ठीक करेंगे। कांग्रेस तो कहा जा रहा है बड़ा गड़बड़ होगा। 59 सीटों पर चुनाव लड़ रही है। वो 10 से 20 सीट पे सिमट जाएगी। मुकेश सहनी के लिए कहा जा रहा है कि उनका बोहनी जो है वो मुश्किल है। अभी कितना सच कितना फंसाना क्योंकि डिप्टी सीएम बनाए गए थे। बहुत जबरदस्त तरीके से प्रोजेक्ट किए गए थे। काफी पॉपुलैरिटी मिली थी। राहुल गांधी साथ में मछली पकड़े थे। बहुत कुछ हुआ था। तो देखने वाली बात है। सीपीआईएमएल की बात कही जा रही है कि 12 सीटों पर लड़ी थी। छ से नौ सीटों पर आएंगे। वह ठीक-ठाक अपना कर रहे हैं। यह पूरी कहानी है। फैक्टर जो है वह महिलाओं को लेकर ही कहा जा रहा है कि इस सबके पीछे नीतीश बाबू का महिला फैक्टर जो है वो मजबूत रहा और वही उनको जीता सकता है। ये एक बड़ी बात निकल कर आई है। नीतीश के खिलाफ एंटी इनकंबेंसी पोल के पापा कह रहे हैं नहीं है। इस वजह से भी फायदा हो रहा है। लोग मान रहे हैं कि एंटी इनकंबेंसी नहीं रही। सत्ता को लेकर ही रहा इसलिए लोग कह रहे हैं फेयरबल देते हैं। अच्छा गुड बाय करते हैं नीतीश बाबू को। आरजेडी की पुरानी इमेज जो है वो परेशान करती रही। वो जंगल राज परेशान करता रहा और यह माना जा रहा है कि वो भी एक बड़ी वजह है जिसकी वजह से नुकसान होगा। कई लोग ये कह रहे हैं कि तेजस्वी को पिछले दौर का नुकसान। कोशिश तो की है लेकिन बार-बार जो एनडीए मुद्दा उठाया उसकी वजह से नुकसान हो रहा है और यही कहानी जो है रहेगी नीतीश बाबू के वापसी होने की। अह नीतीश के साथ मोदी भी बिहार में पॉपुलर हैं। प्रशांत अनपॉपुलर हो गए। यह भी बात निकल कर आई है कि प्रशांत किशोर बहुत जोर लगाए लेकिन अह तीसरे विकल्प के तौर पर ग्राउंड पर अपने आप को प्रोजेक्ट नहीं कर पाए। सोशल मीडिया पर चर्चा है, पत्रकारों में चर्चा है। बाहर रहने वाले बिहारियों में चर्चा है। लेकिन कहा जा रहा है कि बिहार के अंदर बहुत कमाल ने। 243 में से दो-तीन सीट पर मामला है। बाकी नहीं। ऐसा कहा जा रहा है। सर्वे और एग्जिट पोल में। कितना सच, कितना फंसाना 14 तारीख को हम देखेंगे। वैसे भी एक कहावत है कि ना भैया मूड में कई बार कोई बाल कटवाने गया था तो कहे भैया छी लेंगे गिन लीजिएगा तो 14 तारीख को देख लेंगे महागठबंधन के लिए फिलहाल कांग्रेस और वीआईपी कमजोर कड़ी बताई जा रही है इनकी वजह से नुकसान हो रहा है क्योंकि आरजेडी फिर भी ठीक-ठाक कर रही है ये दोनों मामला फंसा पड़ा कितना सच कितना फसाना 14 तारीख को देख लेंगे कुल मिलाकर 14 तारीख को इंतजार रहेगा एग्जिट पोल जो हालांकि है वो एनडीए को बहुमत दे रहा है नीतीश को बहुमत दे रहा है नीतीश को अच्छा फेयरबल देने का मन बता रहा है बिहार की जनता ऐसा लग रहा है कि नीतीश बाबू के साथ गई है। लेकिन फिर भी यह भरोसे पर मोहर लगी है या एग्जिट पोल जो पहले भी गलत हुए वो दोबारा गलत होंगे। यह देखने वाली बात है। क्या युवा जो सड़कों पर उतरे थे वो रोटी पलटेंगे या नहीं। प्रशांत किशोर आय हाय देखना होगा क्या होता है उनका। मोदी नीतीश की जोड़ी क्या तेजस्वी पर एक तरफा भारी होगी? देखना होगा। फिलहाल इस बार बिहार में वोट ऐतिहासिक पड़ा है। दोनों साइड ने जोर लगाया था इसलिए ज्यादा वोट पड़ा है। देखना होगा बिहार का भविष्य क्या है। नितीश बाबू मसीहा रहेंगे या तेजस्वी नौकरी का योद्धा बनेंगे? धागा कौन खोलेगा? कौन जीतेगा बिहार? आप बताओ कमेंट सेक्शन में कि कह रहा हो बिहार? कमेंट सेक्शन में बताइए।

Kiski sarkar 🥰🥰
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